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चाइनीज लोन ऐप्स ने लगाया भारतियों को करोंड़ो का चूना


चाइनीज लोन ऐप्स मामले में ईडी ने अपनी जांच तेज कर दी हैं। जांच के मुताबिक भारत में कोरोना काल के संकट का फायदा उठाकर चाइनीज लोन ऐप्स ने लाखों लोगों को ठगा, जो वित्तीय संकट में थे। इस दौरान काफी लोंगो ने कई मुसीबतों का सामना किया। जैसे कई लोगों की नौकरी चली गई और इनमें ज्यादातर वो लोग थे  जो गरीबी रेखा के नीचे आते थे। इन्हीं हालातो को देखते चीनी ऐप्स ने ज्यादा से ज्यादा ब्याज दरों पर short term loan का प्रस्ताव रखा जिससे एक ऐसी स्थिति पैदा हुई जहां लोगों को उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और दुर्व्यवहार का शिकार होना पड़ा।

ऐसे देते थे धमकी

केंद्रीय जांच एजेंसी का कहना है कि कैसे चाइनीज ऐप्स ने भारत के कमजोर regulatory framework का फायदा उठाकर काफी मुनाफा कमाया। ईडी की जांच में पाया गया है कि ये ऐप लोन पर 2,300 फीसदी तक ब्याज वसूल रहे थे। ऐप्स ने खासकर समाज के कमजोर वर्ग को निशाना बनाया और भुगतान न कर पाने पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न और अड्लट वेबसाइटों पर कॉल गर्ल के रूप में दिखाने की धमकी तक दी। साथ ही लोन चुकाने के समय इन ऐप्स को उधार लेने वाले के फोन के संपर्कों तक पहुंचने की सुविधा होती है और अगर कोई लोन समय पर नहीं चूका पाता तो  “चोर” जैसे संदेश पीड़ित के मित्रों और रिश्तेदारों को भेजे जाते।

जांच के दौरान यह पाया गया कि माई बैंक, मनी बॉक्स, लोन ग्राम, कोको कैश, पांडा रुपया, कैश पॉट, नीड रुपी आदि जैसे ऐप चीन में Cloud Based Server से सीधे इंस्टॉल, एक्सेस, उपयोग और मॉनिटर किए गए थे। आपको बता दें कि इन ऐप्स पर भारतीय कंपनियों का कोई कंट्रोल नहीं था। दिलचस्प बात यह है कि भारत में  इस पूरे घोटाले को अंजाम देने वाले चीनी व्यक्ति क्यू यांग पेंग और श्री लाइ (Q Yang Peng and  Mr. Lai) पहले ही फरार हो गए। सूत्रों का कहना है कि इन लोगों के खिलाफ पहले से ही लुकआउट नोटिस जारी है।

जांच के दायरे में आने वाली कंपनियों में शामिल हैं:

  1. मैड एलिफेंट टेक्नोलॉजीज – क्यू यांग पेंग
  2. रूमिंग टेक – मिस्टर लाई
  3. बैरोनीक्स टेक्नोलॉजीज – श्री लाई
  4. माननीय सूचना प्रौद्योगिकी – श्री लाई

जाचं करते समय पाया गया कि NBFC License वाली भारतीय कंपनियों का चीनी ऐप्स ने गलत इस्तेमाल किया था। Jamnadas Morarjee Finance Company इस कंपनी के नाम पर ये लोग अवैध कारोबार करते थे। अधिकारियों का कहना है कि  इन लोगों ने घोटाले को अंजाम देने के लिए पेमेंट एग्रीगेटर रेजरपे का इस्तेमाल किया।

इन लोन ऐप्स की सूची बहुत लंबी है। हालांकि भारत सरकार उनमें से कुछ को ब्लॉक करने में कामयाब रही है लेकिन कई नई कंपनियां अभी भी ये काम कर रही हैं। भारतीय जांच एजेंसियां मनी व्यू, क्रेजी रुपी, रुपी बियर, लेंड नाउ, पैसा लोन, रुपी की, पाम कैश, स्मॉल वॉलेट, फ्लिप कैश, कैश ट्रेन, एंजल वॉलेट आदि लोन ऐप पर नजर रख रही हैं।

प्रभावी ब्याज दर 2,000 प्रतिशत से अधिक

अगर 5,000 रुपये का लोन 7 से 14 दिनों के लिए लिया जाता है तो 1,500 रुपये का प्लेटफॉर्म शुल्क लिया जाता है। हालांकि ब्याज दर 36 फीसदी है और लौटाई जाने वाली राशि लगभग 5,800 रुपये है। अधिकारियों ने कहा कि प्लेटफॉर्म शुल्क के कारण प्रभावी दर 2,000 फीसदी से अधिक हो जाती है।

ऐप्स द्वारा उपयोग किये जाने वाले recovery methods :

कॉल सेंटरों के बाहर 100 से 200 टेलीकॉलर काम करते हैं।

सबसे पहले  6वें  और 7वें दिन एक फोन कॉल किया जाता है और फिर उधारकर्ता को भुगतान करने के लिए 20 से 25 मिनट का समय दिया जाता है।

आधार और पैन को ब्लॉक करने के लिए और संदेश व्हाट्सएप पर या कॉल के माध्यम से भेजे जाते।

कुछ देर बाद कर्जदारों के रिश्तेदारों को फोन कर अभद्र भाषा का प्रयोग किया जाता।

जिन लोगों के नंबर फोन में स्टोर हैं उन्हें बताया जाता है कि वे गारंटर हैं और उन्हें कर्ज चुकाना है।

संपर्क सूचियों का इस्तेमाल करके व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जाता और अपमानजनक संदेश भेजे जाते।

फोन में महिलाओं संपर्कों को विशेष रूप से निशाना बनाया जाता और उन्हें अश्लील संदेश भेजे जाते।

फर्जी कानूनी नोटिस बनाकर कर्जदारों की संपर्क सूची में पेश किया जाता।

 

 

 


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